अपने काम का ब्यान कहां नहीं करना चाहिए ?

नमस्कार दोस्तों और कैसे है आप सब ? हम आशा करते हैं कि आप अपनी सेहत का ध्यान रख रहे होंगे। ये दिन थोड़े मुश्किल जरूर है,पर कोई भी चीज मुश्किल नहीं होती।हम ही हिम्मत हार जाते हैं। आपको हिम्मत रखने की जरूरत है और अपनी मुश्किलों पे काम करते रहने की। तो आज हम बात करेंगे कि अक्सर हमारे साथ ऐसा क्यों होता है कि

लोग हमें समझ नहीं पाते

हमारे काम का मजाक उड़ाते हैं

यहां तक कि हम कितना भी अच्छा कर लें, उन्हें वो काम भाता नहीं।

आइए इसे एक मुहावरे के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।

आज का मुहावरा

आज का मुहावरा है

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यानी कि ऐसी जगह में आपने अपने काम का ब्यान किया या करते हो जहां उस काम को कोई जानता ही नहीं। आप चाहे कितनी ही कोशिश कर लें,बात बनने नहीं वाली। इसका कारण क्या है ?? कारण ये है कि वहां पे उस काम की जागरूकता ही नहीं है।

एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए कि आप १९८० के दशक में हो। उस समय कंप्यूटर का इतना चलन भारत में नहीं था। पर एक सनकी इंसान फिर भी इसे रोज़ बेचने निकलता था। उसकी बेइज्जती होती थी। लोग क्या क्या नहीं कहते थे। पर वो बेचने कि कोशिश करता था। इस शक्स का नाम था विप्रो के मालिक अजीज प्रेम जी।

वहां पे लोगों कि गलती थी ,,??

अक्सर हम जब कुछ बड़ा कर रहे होते हैं और दूसरा आदमी हमें समझता नहीं तो हम उसके साथ लड़ना शुरू कर देते हैं, ये ग़लत है। क्युकी जब उसने वो चीज कभी देखी है नहीं तो वो कैसे विश्वास करेगा ?? आपको उस काम को करके बताना पड़ेगा।

बिना करे ब्यान करना मूर्खता होगी।

अगर आप ये उम्मीद लगाके बैठे हो किं उस जगह पे भी आपको समझा जाएगा जहां उस काम को कोई जानता ही नहीं। ये और भी मूर्खता है। आपके काम को ब्यान करना गलत है।

काम को ब्यान वहां करें जहां थोड़ी बहुत उसकी कद्र हो। लोग जानते हो।आप एक डॉक्टर के पास जाके जुराबों का ब्यान ज्यादा नहीं कर सकते।चाहें वो इसे रोज़ पहनता है। उस बस पहनने से मतलब है, जुराब बनती कैसे है, इस से कोई मतलब नहीं।

वरना वो ही बात हो जाएगी

जंगल में मोर नाचा किसने देखा ?

आज के लिए इतना ही दोस्तों।जल्द मिलेंगे एक नए मुहावरे के साथ।यहां आने और पड़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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