मुश्किल में दूसरों से उम्मीद के बारे में ये मुहावरा क्या कहता है ?

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब का स्वागत है इस ब्लॉग में। आज हम बात करेंगे कि दूसरों से हमें मुश्किल में उम्मीद क्यों नहीं लगानी चाहिए। आइए समझते हैं और जानते हैं।

भूमिका

अक्सर हम जब भी मुसीबत में होते हैं तो दूसरों से उम्मीदें लगा कर बैठ जाते हैं। हमें लगता है कि दूसरा बंदा आपके कोई इंसान हमारी मदद करेगा ।क्या जो वाकई सच है आज के दौर में उम्मीद लगाना बहुत ही ज्यादा हानिकारक और गलत है ।

कैसे?

क्योंकि आज के दौर में किसी को फुर्सत ही नहीं इतनी भागा दौड़ है ।इंसान को अपने लिए समय नहीं है । उसे अपने बारे में सुधार के लिए भी सबसे सबसे पहले दूसरे से मशवरा लेना पड़ता है। उसे अपनी आदतों के बारे में जानने के लिए दूसरे से सलाह लेनी पड़ती ।इसका कारण यह है कि हम दूसरों के ऊपर तो बहुत समय व्यतीत करते हैं और अपने ऊपर बहुत कम समय व्यतीत करते हैं।

और जब आप मदद की आ जाती है तो आप यहीं से अंदाजा लगा लीजिए की जब हमारे लिए अपने पास समय नहीं है, तो हम दूसरों के लिए समय कहां से निकाल देंगे ?

क्या यह काल्पनिक और गलत नहीं है ?

जब भी बात मदद की आती है तो बिना जज्बातों से ये मुमकिन नहीं ।हमें यह सिखाया जा रहा है कि आपके जज्बात आप के सबसे बड़े दुश्मन हैं। हमें अपने जज्बातों को नहीं सुनना चाहिए ।माने या ना माने यह चीज हर दूसरा व्यक्ति सुनता है और इसका पालन करता है।

साथ ही साथ हमें बस अपने आप को बेहतर करने की ललक है और हमें यह सिखाया जा रहा है ।अगर आप दूसरों की मदद करेंगे तो आप से वो आगे निकल जाएंगे ।आपको आगे बढ़ने के लिए अपने साथ वालों को हराना पड़ेगा ।या फिर खत्म करना पड़े पड़ेगा तभी आप उनसे बेहतर बन सके बन सकते हैं।

तो ऐसे दौर में जहां पर इंसानियत बहुत नीचे आ चुकी है आ चुकी है वहां पर हम कैसे और क्यों दूसरों से उम्मीदें लगा तभी तो एक कहावत भी है ना

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तो कृपया जब भी मुश्किल पड़े कोशिश करें क्या आत्मनिर्भर बने और दूसरों की बजाए खुदा से उम्मीद लगा अभी के लिए इतना ही धन्यवाद स्वस्थ रहें खुश रहें

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