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कोन सा मुहावरा प्रयत्न का महत्त्व बताता है?

नमस्कार दोस्तों और कैसे हैं आप सब ? स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर। आप हमारे कार्य को बहुत आदर और प्यार से रहे है। इस बात के हम आभारी हैं। तो आयिए देखते है आज का मुहावरा हमें क्या सीखा रहा है।

आज का मुहावरा

आज का मुहावरा

दोस्तों बड़े सपने देखना अच्छी बात है। हर किसी को देखने चाइए। इसमें कोई बुराई नहीं है। पर आज के दौर में कुछ च्चीजों का जो चलन है वो हैरान कर देता है। सबने बड़ा करना है और जल्दी करना है। शायद जल्दी जो हासिल करता है वो सबको पसंद आता है। चाहे कितना भी कोई बुद्धिमान हो,हर कोई आजकल इसी हिसाब से चलता है।

पर कामयाब कितने हो पाते है ? दोस्तों अगर आपको काम खाना है तो आपको कम भोजन खरीदना पड़ेगा। अगर आपको ज्यादा खाना है तो ज्यादा भोजन। ये ही चीज हमारे काम पे लागू होती है। बड़े काम के लिए बड़ा प्रयत्न करना पड़ता है। अब इस को आप जल्दी कीजिए यान फिर देरी से ये आप के ऊपर है।

जितना बड़ा आपका काम होगा उतना ही बड़ा आपका प्रयत्न होना चाहिए। अब ये बड़ा प्रयत्न कई तरह का हों सकता है। जरूरी नहीं कि ये शारीरिक ही हो।

बड़ी सोच।

बड़ी योजना

ज्यादा समय

ऐसी ही चीजें इस में आती है। तभी तो कहा भी गया है।

ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती .

प्यास लगी है तो पानी ज्यादा ही पीना पड़ेगा।

बड़े बड़े आज कि सदी के जो लोग हैं जिनको आप कहानियों में किस्सों में सुनते हो। वो कैसे कामयाब हुए ? उन्होंने सोच को बड़ी रखा। पर साथ ही साथ उनका प्रयत्न भी बड़ा था। लगन अपने काम में थी। अपने काम से प्यार था।

तो दोस्तों अगर कुछ बड़ा हमें करना है तो उसके लिए प्रयत्न भी बड़ा ही करना पड़ेगा। छोटे प्रयत्न से बड़ी कामयाबी नहीं मिलती।

आज के लिए इतना ही।

धन्यवाद।

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मुश्किल में दूसरों से उम्मीद के बारे में ये मुहावरा क्या कहता है ?

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब का स्वागत है इस ब्लॉग में। आज हम बात करेंगे कि दूसरों से हमें मुश्किल में उम्मीद क्यों नहीं लगानी चाहिए। आइए समझते हैं और जानते हैं।

भूमिका

अक्सर हम जब भी मुसीबत में होते हैं तो दूसरों से उम्मीदें लगा कर बैठ जाते हैं। हमें लगता है कि दूसरा बंदा आपके कोई इंसान हमारी मदद करेगा ।क्या जो वाकई सच है आज के दौर में उम्मीद लगाना बहुत ही ज्यादा हानिकारक और गलत है ।

कैसे?

क्योंकि आज के दौर में किसी को फुर्सत ही नहीं इतनी भागा दौड़ है ।इंसान को अपने लिए समय नहीं है । उसे अपने बारे में सुधार के लिए भी सबसे सबसे पहले दूसरे से मशवरा लेना पड़ता है। उसे अपनी आदतों के बारे में जानने के लिए दूसरे से सलाह लेनी पड़ती ।इसका कारण यह है कि हम दूसरों के ऊपर तो बहुत समय व्यतीत करते हैं और अपने ऊपर बहुत कम समय व्यतीत करते हैं।

और जब आप मदद की आ जाती है तो आप यहीं से अंदाजा लगा लीजिए की जब हमारे लिए अपने पास समय नहीं है, तो हम दूसरों के लिए समय कहां से निकाल देंगे ?

क्या यह काल्पनिक और गलत नहीं है ?

जब भी बात मदद की आती है तो बिना जज्बातों से ये मुमकिन नहीं ।हमें यह सिखाया जा रहा है कि आपके जज्बात आप के सबसे बड़े दुश्मन हैं। हमें अपने जज्बातों को नहीं सुनना चाहिए ।माने या ना माने यह चीज हर दूसरा व्यक्ति सुनता है और इसका पालन करता है।

साथ ही साथ हमें बस अपने आप को बेहतर करने की ललक है और हमें यह सिखाया जा रहा है ।अगर आप दूसरों की मदद करेंगे तो आप से वो आगे निकल जाएंगे ।आपको आगे बढ़ने के लिए अपने साथ वालों को हराना पड़ेगा ।या फिर खत्म करना पड़े पड़ेगा तभी आप उनसे बेहतर बन सके बन सकते हैं।

तो ऐसे दौर में जहां पर इंसानियत बहुत नीचे आ चुकी है आ चुकी है वहां पर हम कैसे और क्यों दूसरों से उम्मीदें लगा तभी तो एक कहावत भी है ना

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तो कृपया जब भी मुश्किल पड़े कोशिश करें क्या आत्मनिर्भर बने और दूसरों की बजाए खुदा से उम्मीद लगा अभी के लिए इतना ही धन्यवाद स्वस्थ रहें खुश रहें

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इस बेहतरीन पुस्तक को कैसे पढ़ें – The Alchemist

नमस्कार दोस्तों। कैसे हैं आप सब ? आशा है कि सबकी जिंदगी खुशियों और उमंगों से भरी है। जानता हूं इस मुश्किल घड़ी में शायद हमारे लिए हस्ना थोड़ा सा कठिन सवाल बन गया है। पर यकीन मानिए असली खुशी का मजा बुरे वक़्त में ही आता है। हमारी पहली पुस्तक इस हिंदी श्रृंखला की इसी पे आधारित है। इसमें आपको सब मिलेगा। हर हिस्से में आप इस पुस्तक (Alchemist)को रखेंगे और पाएंगे कि ये खरी ही उतरेगी इस पुस्तक का नाम है

The Alchemist

सारांश

इस पोस्ट में हम ये बताएंगे की इस पुस्तक को पड़ना कैसे है ? पर देख लेते हैं कि इसमें है क्या ?? ये एक लड़के को कहानी है जो अपनी जिंदगी इत्मीनान से काट रहा है। पर एक बैचानी उसके मन में रहती है।एक सवाल वो हर रोज़ अपने आप से पूछता है। उस लगता है कि वो कुछ अलग करने को बना है। कुछ नया।उस कुछ सपने भी आते हैं।तो क्या होगा उसका। क्या सच में वो अपने बारे में सही है या बस ये एक ख्याली उपज है। हम आपको हर पहलू से रूबरू करवाएंगे। इस साइट में हम हर पुस्तक को तीन भागों में बांटते है। और थोड़ा थोड़ा बताने की कोशिश करते हैं। अगर सब बता देंगे तो आप पड़ोगे क्या ??

ये कहानी है जिंदगी के मकसद कि, प्यार की, त्याग की।इसमें आंसू भी है और हसी भी, भोलापन भी है और चालाकी भी, दोस्ती भी है और धोखेबाजी भी।

ये कहानी है हर किसी की जिंदगी की

ये कहानी है एक Alchemist की।

इस पुस्तक को कैसे पढ़ें ?

आप जानते है कि हर चीज को पड़ने का करने का एक ढंग होता है । तो आयी जानते हैं कि इस पुस्तक को पड़ने का आपका सही नजरिया क्या हो सकता है ? याद रखिएगा हमारा काम सुझाव देना और आप तक पुस्तक को पहुंचाने का है। सही रास्ता आपने तय करना है।

क्या ये एक सेल्फ हेल्प पुस्तक है ?

जी नहीं, हालांकि जब आप उसे पड़ते है तो आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसको पड़ने के बाद आपका जीने का नजरिया भी बदलेगा। आप भी अपने से सवाल पूछोगे पर ये एक कहानी है।

नोट बनाए

जी, जब भी आप किसी भी पुस्तक को पड़ते हैं तो नोट जरूर बनाए है। चाहें वो फिर एक शब्द ही क्यों ना हो। आजकल बहुत से ऐसे सोर्स हैं जहां आप ये कर सकते हो। जरूरी नहीं कि कापी पेन उठाना पड़े। तो उन चीज़ों को इकठ्ठा करें जिन्हें आप पसंद करते हैं। क्यूंकि कभी ना कभी वो काम आएंगी।

रोज़ पड़ना सही रहेगा या कभी कभी ??

सही बताएं तो रोज़ पड़ने का मजा ही कुछ और है। पड़ने के बहुत फायदे हैं। और जब आप ऐसी पुस्तक को पड़ते है तो फिर क्या ही कहने । पर कुछ नियम ना बनाए। जिंदगी में कुछ चीजें आवारगी से भी करनी चाहिए। खास कर वो चीजें जो कला से जो कला से जुड़ी हों। तो आप में कि सुने और पड़ें।

क्या इसमें आप बोर हो सकते हैं ??

बिल्कुल नहीं। ये एक फिल्म के जैसे है। इसमें सब कुछ मिलेगा बस जुड़ना आपको है। ये एक मनोरंजक पुस्तक है।

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हमारे विचार Alchemist पर

ये एक ऐसी पुस्तक है जो बातों ही बातो में वो चीजें बता देती है जो शायद एक वीडियो भी ना बता पाए। ये जिंदगी को बदलने वाली पुस्तक है।

तो अगर आपको जान ना है की वो क्या है जो आपको कामयाब होते देखना चाहता है? अगर सच में आपको अपने सपने से प्यार है। अगर आप एक आम इंसान के जैसे कुछ बड़ा करना चाहते हो। अगर आप समाज को जान ना चाहते है। और अगर आपको भेड़ों से, कुदरत से , हवाओं से प्यार है तो ये पुस्तक आपके लिए ही बनी है।

अभी के लिए इतना ही

पढ़ने की बेकरारी मुश्किलों पे भारी पड़ती है।

हमारी वेबसाइट पे आने के लिए धन्यवाद ।

English में पढ़ने के लिए

 

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Blog I am not I Who Am I

Theories of science – I am not I Who am I part -2

Introduction

Theories of Science

Hello friends and how are you doing? I hope everyone is doing good. Situations may be tough but you know what, you are tougher than situations.

Well in the previous part of this book you have read how a settled business went on a mission to seek himself. Well, today we will tell you what you are going to read in chapter four, five and six of the book I am not I Who am I.

So lets quickly check out what we have today.

Summary of chapter 4,5,6

What more could be there

Summary

Well in these chapters you will get to know about your inner identity. For eg brain. Can you tell yourself that you are a brain ?? Is the human brain is his identity ?? The writer will explain it’s biological theories and in scientifical methods. We are not the outer body but are we our inner body ?? If it’s true than what is inside us which explain to us who we are ??

Is there is something beyond our eyes which is holding us ?? If it is true than what we can say to it ?? In these three chapters, the writer has taken a hard call on our inner identity. He explained that our identity is who we are from inside. How he had explained ?? You have to read this book and find out theories behind it.

What more could be there

Well, when we talk about any self discover the topic, the presence of God should be there. We should not feel shame to say that Yes we are under God. Why people take so many other names to describe him. What we felt while reading these chapters where there is a lack of spiritual explanation.

Yes, what he explained he explained well. Hats off to the writer. We are not criticising him but something is missing. He explained the missing part but never mentioned about it.

It was masterstroke or what ?? Well, who knows but that what we feel…

Thank you and it was the review of these chapters of the book

I am not I Who am I?

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Daily Proverbs

Being optimistic works – How ?? See this proverb

Introduction

Hello friends and how are you doing ?? Today we will talk about a very practical type of proverb. It fits on today’s situations. Yeah… Probably everywhere around us. So without wasting any time lets start this. How to do optimistic works?

Optimism is good or bad

A horse was in the rain and he has no clothes. He was in trouble and away from hometown. No one was there for help. But he was optimistic and hoping for the best. He waited for three hours for the rain to be stopped. It was tough but he was optimistic. Finally, the rain stopped. Not in three hours but in five hours. But because the horse was full of optimism he survived that period.

That’s how it works. But there are some people in life who believes in bad or unreal things. Like, suppose if horse thought I will wait for 7 hours. That could be bad, very bad actually.

Does it mean it works in bad situations ??

The answer is Yes. How ?? Always remember every bad ending means something good is going to start. Now everything gonna is all right. That’s what today proverb is all about and Here it comes

Proverb is uploading

 

Meaning

It is a British proverb. In Britain, they say “Rain before seven, fine before eleven”. Means this is a bad time but very soon we will have a good time. Nothing to worry. Do not lose hope. Yeah, the day has been started and it has been raining since morning. But nothing to worry my friend. Very soon clouds will be cleared and we will have a whole day to work.

Conclusion

Does not matter in how much tough situation you are ?? Things will improve. Just keep hope and faith. Be optimistic. In every situation, officially unofficially does not matter. At some degree, everyone has to follow this. It will keep us positive.

Thank you for reading.

God bless everyone.